विवेकानन्द नीडम् ग्वालियर रेलवे-स्टेशन से मात्र३.५ किलोमीटर की दूरी पर है।झाँसी रोड पर स्थित चन्द्रवदनी नाके से हरिशंकरपुरम् की ओर जाने वाली सड़क को नीडम् मार्ग कहते हैं जो सीधा,रेलवे लाईन पर बने रेलवे गेट को पार कर नीडम् को पहुँचता है।नगर के किसी भी आटो रिक्शे से अथवा अन्य वाहन से नीडम् पर पहुँचा जा सकता है।
मानचित्र से दिशा निर्देश प्राप्त करें।
" भगवान तुम्हें खुले ह्रदय से इसलिये देता है ताकि तुम भी मुक्त हस्त, खुलेह्रदय से दान दे सको।"
- स्वामी विवेकानन्द
सभी समाजसेवी महानुभाव तन,मन एवं धन से सहयोग कर समाज के सभी लोगों के जीवन में आनन्द, सुख-शांति और संतोष लाने के कार्य को सफल बनायें।
कृपया अपने चेक, ड्राफ्ट एवं मनी आर्डर आनन्द केन्द्र ग्वालियर के नाम से भेजें। आपके द्वारा दिया गया दान आयकर अधिनियम की धारा ८० जी के अन्तर्गत करमुक्त है।
स्वामी विवेकानन्द जी के आदर्शों से प्रेरणा प्राप्त कर यह केन्द्र ग्वालियर ही नहीं अपितु ग्वालियर के बाहर जाकर भी समाजसेवा के विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों में अपना योगदान देता आ रहा है,जिसमें प्राकृतिक चिकित्सा,योग,ध्यान एवं अध्यात्म भी सम्मिलित है।मनुष्य का शारीरिक,मानसिक एवं आत्मिक विकास विवेकानन्द केन्द्र,ग्वालियर का मुख्य ध्येय है।इसी दृष्टि से वर्ष १९९५ में विवेकानन्द नीडम् की स्थापना की गई जो प्राकृतिक पहाड़ी पर नीरव,शान्त वातावरण में स्थापित सादगीपूर्ण,तनावरहित,प्रदूषणरहित,मनोहारी एवं सुरम्य वातावरण देने वाला एक सुप्रसिद्द स्थान है।
ग्वालियर यद्यपि विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं की दृष्टि से समृद्ध है,यहाँ शैक्षणिक क्षेत्र के अनेक संस्थान और विश्वविद्यालय कार्यरत हैं, लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग में किसी भी मान्य एवं विधिसम्मत् शिक्षण संस्था का अभाव था, अतः विवेकानन्द नीडम् ने सन् २००३ में "निरामय अकादमी आँफ योगा एन्ड नैचुरापैथी,रिसर्च ट्रेनिंग इंस्टीटयूट" की स्थापना की गई।यह नई दिल्ली की गाँधी नेशनल अकादमी फाँर नैचुरोपैथी से संम्बद्ध है तथा एन.डी.डी.वाई. के लिये मान्यता प्राप्त है।
विवेकानन्द नीडम् में १४७वीं स्वामी विवेकानन्द जयन्ती समारोह का आयोजन १ जनवरी से १२ जनवरी २०१० तक किया गया । विभिन्न कार्यक्रमों में सभी लोगों ने बहुत उत्साह के साथ हिस्सा लिया । सभी समाचारपत्रों ने सारी गतिविधियों को अपने समाचारों में मुख्य स्थान दिया ।
किशोर वयीन पीढी से समाज बड़ी उम्मीद लगाये रहता है जो तारुण्य के दहलीज पर दस्तक देने को तत्पर हैं । उनमें तत्परता , दक्षता , एकाग्रता , शरीर सौष्ठव और लगन के साथ साथ विनम्रता , साहस , सेवा , श्रद्धा , आदर , और आत्मसम्मान के गुण पनपने चाहिये , ऐसी सभी अभिभावकों की अभिलाषा रहती है ।
योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा एक दूसरे के पूरक होकर , आरोग्य प्रदान करने तथा उसकी रक्षा करना , इस प्रकार जीवनदायिनी विधा के रूप में वरदान बनकर श्रेष्ठ जीवन का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं । इसी अवधारणा को आधार मानकर नीडम् में प्राकृतिक चिकित्सा के दक्ष चिकित्सकों के मार्गदर्शन में निरामय का संचालन किया जाता है ।