प्राकृतिक सम्पदा विकास अर्थात सहजीवन
ईश्वर की रचना ने प्रकृति में रंग बिखेर कर इस धरातल की अनुपम छटा को जीवनदायी बनाया है । चहचहाती चिड़ियों का संगीत कौन नहीं सुनना चाहेगा । रंग बिरंगे फूल , पौधे , फलदार वृक्ष, कलकल करते झरने , धीमी-धीमी गति से चलती बतखें , कबूतर , खरगोश, गिलहरियाँ आदि थके-हारे , उदासीन , परेशान , तनावग्रस्त , व्यक्ति को तरोताजा , उत्साह और शान्ति से भरपूर न कर दें तो आश्चर्य ही है ।
नीडम् परिसर की नीरवता मनुष्य को अपने परम समीप ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । वर्तमान युग की यह सर्वाधिक उपयुक्त , आवश्यक एवं महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं । जिससे मानवीय जीवन सुखकर बनता है । सहजीवन का इससे अधिक अनुपम उदाहरण सम्पूर्ण क्षेत्र में देखने को नहीं मिल सकेगा ।
नीडम् पर बने आवासीय कुटीर अपने आप में अद्वितीय है । उनकी दीवारों में चूहेदानी जैसी रचना होने के कारण वह पर्याप्त ठंडे रहते हैं । मजबूती के साथ साथ सुंदरता का विशेष ध्यान रखा है ।
वर्षा ऋतु के जल का प्रबंधन , पानी का दुरुपयोग न होने देना , कहीं पर भी कीचड़ न होना , टय्यूबवेल की रिचार्जिंग आदि तथा बायोटायलेटस् और कूड़े-कचरे से खाद का निर्माण नीडम् की विशेषतायें हैं ।
